“आखिर मेरी गलती क्या थी?” रात के अंधेरे में वह ख़ामोशी से कम्बल में लेटे हुए सोच रहा था। जनवरी के ठण्ड में भी उसका शरीर पसीने से भीगा हुआ था। वह बहुत घबराहट में था। “मुझे वह हर रोज़ क्यों याद आती है? काश की मैं जैसे ज़िन्दगी के बत्तीस साल इस इंतज़ार में बिता दिया की वह लड़की आएगी जो मुझे बेइंतेहा प्यार करेगी, पर मैंने अपनी ज़िन्दगी में कोई लड़की आने ही नहीं दिया क्योंकि सभी मुझे नर्मल लड़की ही लगी। किसी में भी वह हद से गुजर जाने की ज़ज्बात नहीं थे। और फिर मैं थक गया था जिसकी वजह से मुझसे एक गलती हुयी।
अब सोचता हूँ, क्यों ही उस लड़की से बात किया, क्यों ही उसे अपने ज़िन्दगी में आने दिया। काश की मेरी ये सोच न होती की मैं सिर्फ एक लड़की से प्रेम करूँगा या यूँ कह लीजिये की इश्क करूँगा।” फिर से वह उठ बैठा, उसका घबराहट से बुरा हाल था। उसका दिल बहुत तेजी से धड़क रहा था। ऐसा लग रहा था की जैसे आज उसके ज़िन्दगी का आखिरी दिन है।
वह बिस्तर से उतरकर टहलने लगा। दो साल हो गये जब उसकी पहली बार बात फरह से हुयी थी। न जाने क्यों अनवर को वह बहुत अच्छी लगी जबकि उसके अन्दर ऐसी कोई बात नहीं थी जो अनवर को अपनी तरफ आकर्षित करती। अनवर की सोच किसी एक इंसान पर मर मिटने की थी, बहुत ज्यादा केयर करने की थी जबकि फरह की सोच ऐसी नहीं थी, वह किसी भी स्मार्ट और ख़ूबसूरत लोगों से आकर्षित हो जाने की थी। वह सभी लोगों के साथ बातें करना चाहती थी, एन्जॉय करना चाहती थी।
जबकि अनवर की सोच थी एक औरत को हमेशा अपने इर्द – गिर्द एक दायरा बना के रखना चाहिए और उसकी ज़िन्दगी सिर्फ किसी एक के लिए ही स्पेशल होना चाहिए। और अगर इस ज़िन्दगी से परे कोई और भी ज़िन्दगी हो तो उसके विचार इतने स्ट्रोंग हो की वहां भी वो उसी इन्सान को ढूंढें और उसी को सेलेक्ट करे, चाहें उसके पास उस इन्सान से असंख्य गुना बेहतर मिल रहा हो।
अनवर की फरह से पहली बार बात फ़ोन पर हुयी थी। वह उसे अच्छी लगी, दिल से एक आवाज़ आई की काश फरह मुझे बेइंतेहा प्यार करें, मुझसे इश्क करे। लेकिन वह भूल गया की वह जिससे ये चाहत रखता है उसकी क्या सोच है। शुरू – शुरू में उसे लगा की फरह उसे समझेगी और वो जो सोचता है की जीवन में प्यार सिर्फ किसी एक से होना चाहिए और ऐसा कोई मिले तो फिर अपना सब कुछ उस इन्सान पर कुर्बान कर देना चाहिए, उसे बहुत अच्छा लगेगा।
लेकिन ऐसा नहीं हुआ, अनवर के इस सोच से फरह को चिढ़ होती थी। फिर अनवर उसे अच्छी बुरी हर तरह की कहानियां सुनाने लगा। ये फरह को बहुत अच्छा लगता था। अनवर भी फरह की सारी बातें सुनता था, उसके बचपन से लेकर अभी तक की सारी बातें। वह फरह को बदलना चाहता था अपने इश्क में डालना चाहता था, लेकिन फरह एक आज़ाद ख्याल लड़की थी, और वह अपने जीवन को माजेदार बनाना चाहती थी। और अनवर चाहता था की वह सिर्फ उससे प्रेम करें। सिर्फ उसको सुने, सिर्फ उसकी तारीफ़ करें, उसके हर बात से फरह को सिर्फ प्यार नहीं बल्कि इश्क हो जाए। लेकिन ये सोच तो अनवर की थी की जीवन में सिर्फ किसी एक का होना, उस इन्सान को इश्क से भी आगे तक प्यार करना, अपने – आप को फ़ना कर देना।
इसी उलझन में बार – बार वह उलझ जाता। इस वजह से दोनों में कभी कभी बात होनी बंद हो जाती। फिर कुछ दिन बाद बात शुरू हो जाती। ज़िन्दगी चलने लगती। एक दिन अनवर ने सोचा की अब जब उसे शादी करनी ही है तो क्यों न एक – दुसरे को समझकर और एक दुसरे की पुरानी कमियों को छोड़कर एक नयी शुरुआत किया जाए। यही सोचकर उसने अपने आप को पूरी तरह से फरह के साथ जोड़ दिया। लेकिन ऐसा करने का सिला ये मिला की आज वह बेचैन था पिछले तीन महीने से उसकी हालत बहुत ख़राब है।
Chapter 1
शाम का वक़्त था, अनवर अपने कमरे में खिड़की के पास खड़ा होकर बाहर सड़क की तरफ देख रहा था। कुछ देर यूँही खड़ा गाड़ियों को आते जाते देखता रहा, तभी उसकी नज़र एक कपल पर गयी। लड़की कुछ कह रही थी और लड़का उसको देखते हुए हँसता जा रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे दोनों इस दुनिया से गाफ़िल हों, उन के चहरे पर ज़िन्दगी के सारे रंग देखे जा सकते थे।
दोनों एक दुसरे के बातों में दुनिया को भुलाये, खोये हुए थे। अनवर के होटों पर अपने आप ही एक दुआ आ गयी, “खुदा इनकों दुनिया की बुरी नज़रों से बचाएं।” थोड़ी देर बाद ये मंज़र ख़त्म हो गया, लेकिन अनवर को उसके अकेले होने का एहसास दे गया।
वह अपने ज़िन्दगी के बारे में सोचने लगा, “कितनी वीरान है मेरी ज़िन्दगी, न जाने कब खुदा मेरे ज़िन्दगी में मेरे हमसाये को भेजेगा और कितना इंतज़ार करना होगा उसका। या फिर इस दुनिया में मैं अकेला ही रह जाऊँगा।”
अनवर अपनी ज़िन्दगी के दस साल मेहनत करते हुए गुजरे थे। उसका अब तक का सफर काफी मुश्किल भरा था। लेकिन अब जाकर उसकी ज़िन्दगी में राहत के कुछ पल आये थे। अब वह एक हमसफ़र के बारे में सोचने लगा था। उसको एक साथी की कमी महसूस हो रही थी।
वह थोड़ा उदास हो रहा था इसलिए वह घर से बाहर निकल गया। जब वह एक पगडंडी (छोटा और संकरा रास्ता) से नीचे उतरने लगा तभी वह एक आदमी से टकराया। वह आदमी झलाते हुए बोलने लगा, “अरे भाई देख कर के नहीं चल सकते क्या? ऐसा लगता है की खुदा ने तो तुम्हें दोनों ऑंखें सही सलामत दी है, फिर कहाँ खोये हो?”
अनवर शर्मिंदा होते हुए बोला, “मुझे मुआफ़ कर दीजियेगा भाई।”
“अब आपके मुआफ़ी मांगने से क्या मुझे जो गिर कर चोट लगा है वो क्या ठीक हो जाएगा?” वह आदमी खीजे हुए अंदाज़ में बोला।
“ठीक है फिर, आप बताएं कि मैं क्या करूं तो आपको ठीक लगेगा?” अनवर माज़रत करते हुए बोला।
वह आदमी गुस्से से उसे देखते हुए वहां से चला गया। उसके जाने के बाद अनवर को कुछ राहत हुआ। फिर वह अपने आप से बोल उठा, “ये न जाने मुझे क्या हो गया है? किस तरह से मैं बहकी बहकी हरकत कर रहा हूँ।”
तभी उसे एक पुराने जान पहचान का बंदा मिल गया जो उसके साथ सातवीं क्लास में पढ़ाई किया था, और इसे देखते ही बोल उठा, “और भाई अनवर! घर कब आये हो? यार तुम तो मिलते ही नहीं। मुझे लग रहा है की हमें मिले नौ दस साल तो हो ही गए होंगें।”
“हाँ यार! थोड़ा ज़िन्दगी मुश्किल से गुजर रहा था। और घर भी आना जाना बहुत कम होता है इसलिए मुलाकात नही हो पाती है।” अनवर थोड़ा उदास लहजे में बोला।
इस बार रहना है या फिर कुछ दिन में चले जाना है?
उ….. कुछ दिन तो रुकना है। छोटी बहन का शादी करके ही जाऊँगा।
और बताओ, तुमने शादी कर ली?
नहीं भाई, अभी कहाँ?
कुछ बदले हो या वही फिलोसफी वाली बातें ही करते हो?
बदलना आसान नहीं है, और जो बदल जाऊं वो मौसम तो नहीं हूँ। इन्सान हूँ और इंसान फिलोसफी ही करते हैं, हमेशा कुछ बेहतर की तलाश में।
हाँ ….! ये तो बात तुमने सही कही। कोई इश्क – विश्क का चक्कर चलाये या फिर अभी तक तलाश जारी है।
नहीं भाई, किसी की सोच मेरे दिल को नहीं छुआ कभी। वही छोटी सोच बस ज़िन्दगी किसी तरह से मज़े से जी ली जाये, भले किसी का नुकसान हो या फिर ज़िन्दगी तबाह हो जाये किसी की।
भाई ज़िन्दगी में यही सब तो है, किसी का छुट जाना है और किसी को पा लेना है। पर तुम जिस तरह से सोचते हो, मुझे लगता है की कोई न कोई जरुर होगी जिससे मिलकर तुम अपनी ख्वाहिश को छोड़ दो और शायद उस के साथ रहने लगो फिर वह तुम्हें इतना प्यार करे की तुम मुक्कमल हो जाओ। ऐसा करो फेसबुक पर कोई साथी ढूंढ़कर देखो।
हाहाहाहा …. चलो फिर कभी मिलते हैं भाई। अनवर बोला और दूसरी ओर चला गया।
देर रात तक बाहर ही नदी के किनारे टहलता रहा। उसे इस नदी किनारे आकर बड़ा सुकून मिलता था। वह जब भी यहाँ आता था, सब कुछ भूल जाता था। यहाँ की हवा, मिट्टी, और पेड़ – पौधे सब अपने से लगते थे। वह बचपन से यहीं रहा और जब बाहर पढ़ने गया तो जब भी घर आता, नदी के पास जरुर आता। देर रात तक वहीँ घास पर बैठा रहा। फिर जब घर वापस आया तो मम्मी पूछने लगी, “इतनी देर तक कहाँ थे बेटा? तुम्हारी चाची तुम्हारा पूछ रही थी। उनसे जाकर मिल लेना कल।”
“ठीक है माँ”, अनवर जवाब देकर अपने कमरे में चला गया।
बिस्तर पर लेटा तो उसे अपने फ्रेंड की फेसबुक वाली बात याद आई। वह जनता था फेसबुक पर ज्यादा लोग फ्रॉड ही होते हैं, फिर भी कुछ सोच कर वह एक अकाउंट बनाने लगा।
Chapter 2
फेसबुक पर अकाउंट बन गया। कई सारे फ्रेंड सुझाव आ गया। कुछ चहरे जाने – पहचाने थे तो कुछ अनजान चहरे थे। वो यूँही कई सारे प्रोफाइल को चेक करने लगा तभी उसकी नज़र एक प्रोफाइल पर पड़ा। वह उस प्रोफाइल को ओपन करके डिटेल पढ़ने लगा।
नाम था फारिया जहाँ, उम्र पैंतीस साल, तलाकशुदा और दो बच्चे। एक पल के लिए अनवर के दिमाग में ख्याल आया, शायद ये लड़की ज़िन्दगी के परेशानियों से काफी टूट चुकी हो। अगर मैं इससे बात करके देखूं, हो सकता है की ज़िन्दगी के तजुर्बा इसे इन्सान पहचानने के काबिल बना दिया हो और शायद हम दोनों एक दुसरे के ज़िदगी में सहारा बन सके। मैं इस लड़की को बेइंतेहा प्यार का एहसास दू तो शयद हम दोनों इस ज़िन्दगी के सफ़र और अनंत के साथी हो सके।
मैं कुछ सोचते हुए फारिया को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज दिया, जिसको थोड़ी देर बाद उसने एक्सेप्ट भी कर लिया। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं सोचा कि कुछ लिखर भेजता हूँ। इसलिए मैं लिखा …
अगर आपको ये कहानी अच्छी लग रही है तो मुझे कमेंट में बताएं और हर चार कमेंट के बाद मैं इस कहानी में एक नया चैप्टर पूरा लिखूंगा


Sir, mujhe ye kahani bahut achchhi lag rahi, please ise aage likhen. Main aur bhi janana chahta hun ki anwar ke sath kya huaa? Please ise aage likhen, sir.
Achi hai
Complete kare is story ko.
Bahut achhi kahani hai, aage likhye sahil bhai.
Bahut achhi lagi, aage kya huaa?
Bahut hi badhiya hai 😊😊. Aage likhen. Main apane friends ko bhi share karne wali hun 💓
Mujhe aapka andaz achha lagta hai. Aapke kahane ka style bahut achha hai
Mai aapki class attend ki hun. Aap bahut achha padhate hai. Aap mere life mein aane pahle hai jo itna achha teacher hai. Maine aap se likhna aur bolna sikha hai sir. A
Mai bhagwan se prarthana karti ki aap bahut saare bachon ke jeevan me ujala layen.